Aaj Hi Apne Rab Ko Mana Lo | Zindagi Ka Bharosa Nahin Hai

Aaj Hi Apne Rab Ko Mana Lo | Zindagi Ka Bharosa Nahin Hai




आज ही अपने रब को मना लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है
नार-ए-दोज़ख़ से ख़ुद को बचा लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है

चाँदनी चार दिन की है, लोगो !
ये जवानी भी फ़ानी है सुन लो
आख़िरत अपनी अच्छी बना लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है

क़ब्र में जा के रोना पड़ेगा
ख़ाक पर तुम को सोना पड़ेगा
मौत से पहले ख़ुद को सँभालो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है

चाहिए गर नबी की शफ़ा'अत
मत करो फिर नबी की इहानत
उन की उल्फ़त दिलों में बसा लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है


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